यह पुस्तक केवल विचार ही प्रस्तुत नहीं करती, अपितु विचार का मार्ग भी खोलती है। यह हमें सोचने, देखने और समझने के लिए चुनौती देती है कि क्या भारत केवल एक आधुनिक राष्ट्र है, या वह एक ऐसी सभ्यता है, जो विश्व-मानवता को नई दिशा दे सकती है? यह पुस्तक केवल यह नहीं बताती कि विश्व भारत के सम्बन्ध में कैसी प्रतिक्रियाएँ दे रहा है, अपितु यह भी पूछती है कि भारत स्वयं अपने बारे में कैसी समझ विकसित कर रहा है। यदि यह समझ स्पष्ट, गहरी और संतुलित रही, तो भारत केवल एक शक्तिशाली राष्ट्र नहीं बनेगा, वह एक मार्गदर्शक सभ्यता बनेगा, क्योंकि भारत के पास केवल शक्ति नहीं — दृष्टि है। और, वही दृष्टि भविष्य की दुर्लभतम आवश्यकता है। Read more
यह पुस्तक केवल विचार ही प्रस्तुत नहीं करती, अपितु विचार का मार्ग भी खोलती है। यह हमें सोचने, देखने और समझने के लिए चुनौती देती है कि क्या भारत केवल एक आधुनिक राष्ट्र है, या वह एक ऐसी सभ्यता है, जो विश्व-मानवता को नई दिशा दे सकती है? यह पुस्तक केवल यह नहीं बताती कि विश्व भारत के सम्बन्ध में कैसी प्रतिक्रियाएँ दे रहा है, अपितु यह भी पूछती है कि भारत स्वयं अपने बारे में कैसी समझ विकसित कर रहा है। यदि यह समझ स्पष्ट, गहरी और संतुलित रही, तो भारत केवल एक शक्तिशाली राष्ट्र नहीं बनेगा, वह एक मार्गदर्शक सभ्यता बनेगा, क्योंकि भारत के पास केवल शक्ति नहीं — दृष्टि है। और, वही दृष्टि भविष्य की दुर्लभतम आवश्यकता है।
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| No Specifications | |
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